सैनिक अपने देश के लिए क्या नहीं करते। बात चाहे देश की आंतरिक सुरक्षा की हो या फिर सीमा पर दुश्मन से लड़ने की। इसके लिए विभिन्न देशों को गृह युद्ध अथवा दूसरे देश से युद्ध करना पड़ता है। इस युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है उस देश की सेना और वे सैनिक जो फ्रंटलाइन पर मोर्चा संभालते हैं। उन्हें दुश्मन के सामने डटे रहना होता है। सोना, खाना-पीना सब के लिए थोड़ा वक्त भी मिल जाए तो काफी है। आज हम आपको रूबरू करा रहे हैं सैनिकों की कुछ नई-पुरानी दिलचस्प तस्वीरों से। इन्हें देखकर आप एहसास कर सकेंगे के मोर्चे पर सेना के जवान आखिर अपने खाने का इंतजाम कैसे करते हैं ?

दूरस्थ इलाकों और लंबे मिशन के दौरान सैनिकों को कई बार कम भोजन में भी काम चलाना पड़ता है। वे अपनी रसोई साथ रखते हैं सैनिकों को कुछ इस तरह भी रोटी सेकनी पड़ जाती है जनाब !

अत्याधिक ऊंचाई वाले इलाकों में सैनिकों को समय पर राशन मिलता रहे। इसके लिए विशेष टुकडियां खुद भोजन बनाकर सैनिकों को ताजा भोजन मुहैया कराती हैं ।

सैनिकों को जब कई घंटों तक सीमा सुरक्षा या ऑपरेशन में तैनात रहना होता है तो वे अपने साथ टिफिन लेकर जाना बेहतर समझते हैं। जम्मू-कश्मीर व अरुणाचल जैसे इलाकों में ज्यादातर टिफिन ही सैनिकों का साथी होता है।

'बड़ा खाना' सैनिकों के मुंह से अक्सर यह शब्द सुनने को मिलता है। दरअसल, इसमें बड़ा कुछ नहीं होता बल्कि यह किसी विशेष उपलक्ष में आयोजित किया जाने वाला सामूहिक भोज होता है।

जी हां, यह तस्वीर द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों की है। यकीनन ऐसे में सैनिकों को स्वाद की नहीं सिर्फ पेट भर जाने की जरुरत होती है।

मोर्चे पर डटे रहने वाले सैनिकों के मदद करने वाले कर्मचारियों का काम भी कम मुश्किल नहीं होता। ये तस्वीर विश्व युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के कर्मचारियों की है। सैनिकों के पास खाना खाने के लिए बेहद कम समय होता था।

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जंग लड़ रहे ब्रिटिश सैनिकों की यह तस्वीर बताने के लिए काफी है कि जंग के दौरान सैनिकों को भोजन के लिए कितना कम समय मिलता होगा।

सैनिकों को दिन रात अपनी सीमा और अपने साजो-सामन कि सुरक्षा करनी होती है। वे इसे छोड़कर नहीं जा सकते इसलिए वह खाने के लिए भी कहीं दूर नहीं जा सकते ।

जी हां, यहां न तो समय होता है और न ही बहुत सारे व्यंजन बस एक प्लेट रखने को जीप का बोनट काफी है। इसीलिए तो इन्हें किसी डाइनिंग टेबल की जरुरत नहीं होती।

'यह खाना पेट भरने के लिए बुरा नहीं है लेकिन मैं यहां अपनी मां के हाथ का बना खाना मिस कर रहा हूं।' इस तस्वीर को देखकर ऐसा ही ख्याल आता है न ?

मुझे पहले निगरानी करनी होगी, वरना दुश्मन मेरे लंच टाइम का फायदा उठा सकता है।
मिशन के दौरान

दूरस्थ इलाकों और लंबे मिशन के दौरान सैनिकों को कई बार कम भोजन में भी काम चलाना पड़ता है। वे अपनी रसोई साथ रखते हैं सैनिकों को कुछ इस तरह भी रोटी सेकनी पड़ जाती है जनाब !
खुद के दम पर

अत्याधिक ऊंचाई वाले इलाकों में सैनिकों को समय पर राशन मिलता रहे। इसके लिए विशेष टुकडियां खुद भोजन बनाकर सैनिकों को ताजा भोजन मुहैया कराती हैं ।
टिफिन इनका साथी

सैनिकों को जब कई घंटों तक सीमा सुरक्षा या ऑपरेशन में तैनात रहना होता है तो वे अपने साथ टिफिन लेकर जाना बेहतर समझते हैं। जम्मू-कश्मीर व अरुणाचल जैसे इलाकों में ज्यादातर टिफिन ही सैनिकों का साथी होता है।
बड़ा खाना

'बड़ा खाना' सैनिकों के मुंह से अक्सर यह शब्द सुनने को मिलता है। दरअसल, इसमें बड़ा कुछ नहीं होता बल्कि यह किसी विशेष उपलक्ष में आयोजित किया जाने वाला सामूहिक भोज होता है।
स्वाद नहीं सिर्फ पेट भरने की जरुरत

जी हां, यह तस्वीर द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों की है। यकीनन ऐसे में सैनिकों को स्वाद की नहीं सिर्फ पेट भर जाने की जरुरत होती है।
जो भी मिले खा लो

मोर्चे पर डटे रहने वाले सैनिकों के मदद करने वाले कर्मचारियों का काम भी कम मुश्किल नहीं होता। ये तस्वीर विश्व युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के कर्मचारियों की है। सैनिकों के पास खाना खाने के लिए बेहद कम समय होता था।
सीमित राशन, कम समय

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जंग लड़ रहे ब्रिटिश सैनिकों की यह तस्वीर बताने के लिए काफी है कि जंग के दौरान सैनिकों को भोजन के लिए कितना कम समय मिलता होगा।
दिन-रात तैनात

सैनिकों को दिन रात अपनी सीमा और अपने साजो-सामन कि सुरक्षा करनी होती है। वे इसे छोड़कर नहीं जा सकते इसलिए वह खाने के लिए भी कहीं दूर नहीं जा सकते ।
बस थोड़ी सी जगह

जी हां, यहां न तो समय होता है और न ही बहुत सारे व्यंजन बस एक प्लेट रखने को जीप का बोनट काफी है। इसीलिए तो इन्हें किसी डाइनिंग टेबल की जरुरत नहीं होती।
तपते रेगिस्तान में

'यह खाना पेट भरने के लिए बुरा नहीं है लेकिन मैं यहां अपनी मां के हाथ का बना खाना मिस कर रहा हूं।' इस तस्वीर को देखकर ऐसा ही ख्याल आता है न ?
दोनों काम साथ-साथ

मुझे पहले निगरानी करनी होगी, वरना दुश्मन मेरे लंच टाइम का फायदा उठा सकता है।
No comments:
Post a Comment